मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

दंत-हीन लोकपाल ! हाय रे कांग्रेस !




गहन माथापच्ची के बाद कैबिनेट से लोकपाल बिल को मंजूरी मिलने के बाद सरकार लोकपाल बिल को संसद में 22 दिसंबर को पेश करने जा रही है. इसे दंतहीन लोकपाल बताया जा रहा है जिसको लेकर अन्ना और सरकार के बीच तय है कि विरोधाभास और बढेगा और संसद की लड़ाई सड़क तक आनी तय है. कैबिनेट ने मंगलवार शाम को लोकपाल बिल पारित तो दिया, लेकिन अन्ना हजारे इसमें सीबीआई पर जो चाहते थे उसे स्वीकारा नही गया. सूत्रों का दावा है कि जिस लोकपाल को आना है उसके पास न तो अधिकार होंगे ना ताकत। इससे बिफरे अन्ना ने धमकी दी है कि वह मुंबई में 27 से 29 तक तीन दिन उपवास करेंगे और फिर 30 दिसंबर से जेल भरो आंदोलन शुरू होगा। अन्ना ने कहा यह सरकार अंधी और बहरी हो गई है।

दरअसल लोकपाल बिल अन्ना की ज्यादातर अहम मांगों से परे है. अन्ना हजारे कहते रह गए कि सीबीआई, ग्रुप-सी और न्‍यायपालिका को लोकपाल के अधीन लाया जाए. अन्ना चाहते थे कि सीबीआई लोकपाल के अधीन हो.लेकिन प्रस्तावित विधेयक में सीबीआई का अलग अस्तित्व बना रहेगा.ख़ास यह है कि अन्ना चाहते थे सीबीआई निदेशक की नियुक्ति लोकपाल की तरह हो मगर पेंच यह है कि है कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष का नेता और चीफ जस्टिस मिलकर करेंगे. यह एक नई पहल है कि सिर्फ सरकार ही निदेशक की नियुक्ति नहीं करेगी. सीबीआई में एसपी और उससे ऊपर के अफसरों के चयन के लिए भी कमेटी होगी. अन्ना चाहते थे कि सीवीसी भी लोकपाल के अधीन काम करे, लेकिन सरकार ने उसे भी अलग रखा है. अन्ना हजारे की मांग थी कि ग्रुप-सी के कर्मचारी लोकपाल के दायरे में हों, लेकिन सरकार ने इसकी जिम्‍मेदारी सीवीसी को सौंप दी है.

सबसे अहम् अन्ना हजारे की मांग थी कि सरकारी बिल में व्यवस्था की गई है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ तभी जांच हो सकेगी जब लोकपाल बेंच के तीन चौथाई सदस्य इस पर सहमत हों. प्रधानमंत्री की सुनवाई इन-कैमरा होगी यानी मीडिया और आम जनता वो सुनवाई नहीं देख सकेंगे. कुछ शर्तों के साथ पीएम जरूर लोकपाल बिल के अंदर आ गये हैं। सरकार के इस नये लोकपाल में केस लड़ने के लिए एक टीम होगी और जांच करने के लिए भी एक टीम होगी. लोकपाल में नौ सदस्य होंगे. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज इसके चेयरमैन होंगे. लेकिन लोकपाल को चुनने वाली कमेटी में प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर, लोकसभा में विपक्ष की नेता, चीफ जस्टिस और सरकार के ही चुने एक मशहूर वकील होंगे. अन्ना चाहते थे कि शिकायत करने वालों को तंग न किये जाने की सरकारी व्यवस्था हो लेकिन सरकार शिकायत करने वालों की रक्षा के लिए अलग व्हिसल ब्‍लोअर बिल ला रही है. इससे शिकायत करने वालों की पहचान छिपाई जा सकेगी.

अब अन्ना हजारे ने साफ़ तौर पर कहा कि भ्रष्टाचार खत्म करने को लेकर सरकार की नीयत साफ नहीं है. और ये भी कि उन्हें लोकपाल का नया मसौदा मंजूर नहीं.उन्हें सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने हमें धोखा दिया है। सरकार की नीयत साफ नहीं है वो लोकपाल को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। उसकी पोल खुल जायेगी इसलिए वो सीबीआई पर से अपना अंकुश हटाना नहीं चाहती है। सरकार ने हमारा और संसद का अपमान किया है। इधर सरकार ने भी अन्ना हजारे की मांगों के सामने झुकने से इनकार कर दिया है और कहा है कि लोकपाल के दायरे में सीबीआई नहीं आएगी। सीबीआई के प्रमुख का चुनाव प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश मिलकर करेंगे। वहीं प्रधानमंत्री भी कुछ शर्तों के साथ ही लोकपाल के दायरे में होंगे। अब यह बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस पर विपक्ष क्या रुख अपनाता है यह देखने वाला मुद्दा होगा.अन्ना हजारे को मुंबई में 13 दिनों के अनशन की मंजूरी भी मिल गई है.

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